योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: गोरखपुर में 721 करोड़ की सीवरेज योजना को हरी झंडी
Yogi Cabinet takes Major Decision
Yogi Cabinet takes Major Decision: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट ने गुरुवार को गोरखपुर नगर निगम क्षेत्र में सीवरेज सुविधा के लिए 721 करोड़ 40 लाख 41 हजार रुपये की परियोजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है। उत्तर प्रदेश जल निगम नगरीय की इस परियोजना से 17 वार्डों से 43604 घरों को सेप्टिक टैंक से मुक्ति मिलेगी। इन घरों से निकलने वाले सीवेज न केवल वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण होगा। इससे 195947 की आबादी सीधे लाभान्वितत होगी।
कैबिनेट की ओर से स्वीकृत परियोजना के लिए भारत सरकार 231 करोड़ 34 लाख 94 हजार रुपये देगी। वहीं, राज्य सरकार 435 करोड़ 36 लाख रुपये और नगर निकाय के अंश के रूप में गोरखपुर नगर निगम 27 करोड़ 76 लाख 48 हजार खर्च करेगा। यह परियोजना शहर की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
ये 17 वार्ड होंगे लाभान्वित
बाबा राघव दास नगर आंशिंक, चरगांवा (आंशिक), अशोक नगर, शिवपुर आंशिक, तुलसीराम पश्चिमी, शहीद शिव सिंह क्षेत्री नगर, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल नगर, हरसेवकपुर आंशिक, विश्वकर्मापुरम बौलिया, शालिग्राम नगर आंशिक, लोहिया नगर, कृष्णानगर, शाहपुर, मैत्रीपुरम, शक्तिनगर, राम जानकीनगर और विष्णुपुरम वार्ड।
342 किमी बिछेगी सीवर लाइन
परियोजना के तहत गोड़धोइया नाला के कैचमेंट एरिया के 17 वार्डों में 342.19 किलोमीटर लम्बाई में सीवर लाइन डालने के बाद 43604 घरों को जोड़ा जाएगा। सीवर लाइन के जरिए इन घरों से निकलने वाला सीवेज गोड़धोइया नाला परियोजना में निर्माणाधीन 38 एमएलडी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर लाया जाएगा। यहां ट्रीट करने के बाद गोड़धोइया नाला के अंतिम प्रस्थान बिंदू पर डाला जाएगा। जहां से रामगढ़झील में जाकर मिलेगा।
दो एसपीएस, 1060 केवी का सोलर प्लांट भी बनेगा
इस लाइन में दो स्थानों पर 37.50 एमएलडी 27 एमएलडी का सीवेज पम्पिंग स्टेशन का निर्माण होगा। इसके अलावा 1060 किलोवाट का सोलर पावर प्लांट भी इंस्टॉल किया जाएगा।
क्या बोले अधिकारी
उत्तर प्रदेश जल निगम नगरीय के अधिशासी अभियंता पंकज कुमार ने कहा कि यह परियोजना जल प्रबंधन और शहरी स्वच्छता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इससे गोरखपुर के कई क्षेत्रों में दशकों पुरानी जल व सीवर संबंधी समस्याओं का समाधान होगा। राज्य सरकार की स्वीकृति मिल गई है। शासनादेश जारी होने के साथ ही टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।